Saturday, 6 September 2014

जम्मू-कश्मीर में हर तरफ तबाही:-

जम्मू-कश्मीर में हर तरफ तबाही, 100 से ज्यादा मौतें,




सेना के एक अधिकारी ने बताया कि पुलवामा जिले के पंपोर क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान में लगे सैन्यकर्मियों की एक टीम उस समय झेलम नदी की तेज धारा में फंस गई, जब उन्हें ले जा रही नाव पलट गई। उन्होंने बताया कि 11 सैन्यकर्मी सुरक्षित लौटने में सफल रहे लेकिन नौ सैन्यकर्मी अभी भी फंसे हैं। इन लोगों को वहां से निकालने के लिए दो हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं।



उन्होंने कहा कि कश्मीर में बाढ़ की स्थिति पिछले साल उत्तराखंड में आई बाढ़ जितनी ही गंभीर है। सेना ने समूची घाटी में राहत और बचाव कार्य के लिए 60 टुकड़ियां लगाई हैं। अधिकारी ने कहा, 'अपनी सुरक्षा के लिए खतरा होने के बावजूद सैन्यकर्मी कश्मीर के लोगों को राहत उपलब्ध कराने के काम में जुटे हैं।' अब तक 5 हजार से अधिक लोगों को बचाया गया है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। 



शुक्रवार को राजौरी जिले में मकान गिरने से 13 लोगों की मौत के साथ पूरे राज्य में 54 लोगों की जान चली गई। राज्य में बिजली ढांचा बुरी तरह चरमरा गया है और संचार सेवाएं अस्त-व्यस्त हैं। जम्मू और कश्मीर संभाग में 300 से अधिक गांव जलमग्न हो चुके हैं। शहर की सड़कें नदी में तब्दील हैं और कई इलाकों से संपर्क पूरी तरह कट चुका है। अनगिनत कच्चे-पक्के मकान, स्कूल, सरकारी इमारतें और अन्य भवन ढह चुके हैं।


चिनाब, झेलम सहित लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सेना ने जम्मू में ऑपरेशन 'मेघ राहत' और कश्मीर में 'मिशन सहायता' शुरू किया है। इसके अलावा पुलिस के साथ दिल्ली और पंजाब से पहुंची नैशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) की टीमों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लेने के लिए आज राज्य के दौरे पर हैं।

गुरुवार को बाढ़ में बही बारातियों की बस की तलाश कर 27 लोगों के शव बरामद कर लिए गए। इस हादसे में दूल्हा सहित 60 से अधिक बाराती बह गए थे। राजौरी की थन्नामंडी में एक मकान में परिवार के 12 सदस्य बैठे हुए थे। इस दौरान बारिश तेज होने के कारण बाहर से गुजर रहा एक व्यक्ति भी वहीं पर रुक गया। कुछ ही पलों में पहाड़ से भूस्खलन होने से पूरा मकान मलबे में दब गया। सेना और पुलिस ने मिलकर राहत अभियान चलाया, लेकिन सभी 13 लोगों की मौत हो गई। अब इस परिवार का कोई ऐसा सदस्य नहीं बचा है, जो जनाजों को कंधा दे सके।

पुंछ जिले के विभिन्न हिस्सों में जमीन धंसने से 14 लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार देर रात साब्जियां क्षेत्र में मलबे के नीचे दबने से पांच लोगों की मौत हो गई। इसी तरह से सुरनकोट तहसील के हिल काका क्षेत्र में भी जमीन धंसने से कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इसमें भी पांच लोगों की जान चली गई। मलबे में दबकर मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। जम्मू के अखनूर के परगवाल के साथ सतवारी, मढ़, आरएसपुरा, सांबा जिले के रामगढ़ में भी कई गांव पानी में डूबे हुए हैं। खौड़ में मनावर तवी से भी एक युवती का शव मिला है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हालात देखने रात को स्वयं बाढ़ पीड़ित इलाकों में पहुंचे। अब्दुल्ला ने तीन महीने के एक बच्चे और उसके पूरे परिवार की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। बाराजुला इलाके में स्थित बोन ऐंड जॉइंट अस्पताल में मरीजों को ग्राउंड फ्लोर से ऊपरी मंजिलों पर शिफ्ट करने के दौरान उमर उपस्थित रहे।

इसी दौरान इलाके के एक घर में पानी भरता देख उमर वहां पहुंचे और उस घर में रह रहे परिवार के लोगों को मकान खाली करने को कहा। मकान में रहने वाली महिला ने अपने तीन महीने के बच्चे के घर में फंसे होने की वजह से निकलने से इनकार किया। इस पर उमर ने पहले तो उस महिला और उसके पति को वहां से निकाला और फिर अपने निजी सुरक्षा कर्मियों को उसके बच्चे को बचाने के लिए कहा और खुद भी जुट गए। बच्चे को सुरक्षित मकान से निकालकर मां-बाप के हवाले करने के  note:-this is original post link here.http://tinyurl.com/ll9mrgm
बाद परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

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