Tuesday, 23 September 2014
latest news: भारतीय मूल के युवक पर 'भालू के हमले::-----
latest news: भारतीय मूल के युवक पर 'भालू के हमले::-----: ' भालू के हमले में भारतीय मूल के युवक की मौत':- भारतीय मूल के एक युवक को अमरीका के न्यू जर्सी प्रांत के एक जंगल में भ...
भारतीय मूल के युवक पर 'भालू के हमले::-----
'भालू के हमले में भारतीय मूल के युवक की मौत':-
भारतीय मूल के एक युवक को अमरीका के न्यू जर्सी प्रांत के एक
जंगल में भालू ने हमला करके मार डाला.:-
एडिसन के रहने वाले 22 वर्षीय दर्ष पटेल अपने 4 अन्य मित्रों के साथ न्यू जर्सी के अपशावा वन क्षेत्र में हाईकिंग करने गए हुए थे जब अचानक उनका सामना एक 300 पाउंड वज़न वाले भालू से हो गया.
4 युवक तो फिर से एक साथ मिल गए लेकिन दर्ष पटेल का कहीं पता नहीं था.पुलिस का कहना है कि जब भालू ने युवकों का पीछा करना शुरू किया तो अपनी जान बचाने के लिए पांचों अलग-अलग दिशाओं में भागे.
भालू के पंजों के निशान
बाद में वेस्ट मिलफ़र्ड पुलिस की एक खोजी टीम ने दर्ष पटेल की लाश को खोज निकाला जिस पर भालू के पंजों से हमले के और उसके दाँतों के निशान भी मौजूद थे.
और पुलिस ने साथ ही थोड़ी दूर पर एक भालू को खड़े पाया जो पुलिस के मुताबिक लाश की रखवाली कर रहा था. पुलिस ने उस भालू को गोली से मार गिराया.
उस भालू की उम्र करीब 4 वर्ष थी और उसका वज़न 299 पाउंड था.
लाश के पास ही मौजूद भालू
वेस्ट मिलफ़र्ड पुलिस प्रमुख टिम स्टोरबेक ने कहा,“लाश के पास एक भालू चक्कर काट रहा था और वह उस लाश को छोड़कर जाता नहीं लग रहा था. खोजी टीम ने बहुत कोशिश की कि भालू भाग जाए, तालियां बजाकर औऱ अन्य शोर मचाकर उसे भगाने की कोशिश की गई लेकिन भालू नहीं भागा, वह वहीं डटा रहा. तब पुलिस ने उसे गोली मार दी.:
जंगली जानवरों के जानकारों का कहना है कि अकसर जब कुछ जंगली जानवर अपना शिकार करते हैं तो वह लाश की निगरानी भी करते हैं और उसे छोड़ कर नहीं जाते.
भालू के इस हमले के कारण का नहीं पता चला है. लेकिन कहा जा रहा है कि चूंकि इन पांचों युवकों के पास खाने की चीज़ें भी थीं इसलिए शायद भालू ने हमला किया हो.
ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि दर्ष पटेल का भालू से बचकर भागने के दौरान पैर मुड़ गया हो और वह गिर गए हों जिसके बाद भालू ने उनको निशाना बनाया.
मृत भालू के शरीर की भी गहन जांच हो रही है जिससे यह पुख़्ता तौर पर पता लगाया जा सके कि यह वही भालू है जिसने हमला किया था.
दर्ष आई टी के छात्र
दर्ष पटेल न्यू जर्सी की रटगर्स यूनिवर्सिटी में आई टी के छात्र थे.
रटगर्स यूनिवर्सिटी के चांसलर रिचर्ड एडवर्डस ने इस त्रासदी पर दुःख प्रकट किया है.
न्यू जर्सी में काले भालूओं की संख्या 2400 बताई जाती है जो प्रांत के उत्तरी हिस्से के जंगलों में रहते हैं.
न्यू जर्सी में कई ऐसे मामले हो चुके हैं कि भालू अक्सर रिहाईशी इलाकों में भी आ जाते हैं.
लेकिन भालू द्वारा किसी व्यक्ति को मारे जाने का न्यू जर्सी में यह पिछले 150 वर्षों में पहला मामला बताया जा रहा है. see more click bhalu
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मंगल अभियानः ----
मंगल अभियानः वो 24 मिनट तय करेंगे सफलता
भारत के क्लिक करेंमंगल अभियान का निर्णायक चरण 24 सितंबर को सुबह यान को धीमा करने के साथ ही शुरू होगा
इस मिशन की सफलता उन 24 मिनटों पर निर्भर करेगी, जिस दौरान यान में मौजूद इंजिन को चालू किया जाएगा.
इसमें इस बात की सावधानी रखनी होगी कि यान इतना धीमा न हो जाए कि मंगल की सतह से टकरा जाए और उसकी रफ़्तार इतनी भी तेज़ न हो कि वो मंगल के गुरुत्वाकर्षण से बाहर अंतरिक्ष में खो जाए.
अगर यह अभियान पहले प्रयास में ही सफल रहता है तो भारत एशिया ही नहीं दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जिसने एक ही प्रयास में अपना अभियान पूरा कर लिया था.
चीन भले ही अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत से आगे रहा है लेकिन उसे भारत से बड़ी चुनौती मिलने वाली है.
इस मिशन की सफलता उन 24 मिनटों पर निर्भर करेगी, जिस दौरान यान में मौजूद इंजिन को चालू किया जाएगा.
अगर यह अभियान पहले प्रयास में ही सफल रहता है तो भारत एशिया ही नहीं दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जिसने एक ही प्रयास में अपना अभियान पूरा कर लिया था.इसमें इस बात की सावधानी रखनी होगी कि यान इतना धीमा न हो जाए कि मंगल की सतह से टकरा जाए और उसकी रफ़्तार इतनी भी तेज़ न हो कि वो मंगल के गुरुत्वाकर्षण से बाहर अंतरिक्ष में खो जाए.
चीन भले ही अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत से आगे रहा है लेकिन उसे भारत से बड़ी चुनौती मिलने वाली है.
see more mangal
इस समय दुनिया भारत और चीन के बीच 21वीं सदी की अभूतपूर्व एशियाई अंतरिक्ष दौड़ की गवाह बन रही है. भारत लाल ग्रह पर चीन से पहले पहुंचने की कोशिश कर रहा है.
लेकिन चीन ने 2003 में ही अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजकर भारत को पछाड़ दिया था.
मंगल अभियान की सफलता अंतरिक्ष विज्ञान में चीन को पीछे छोड़ सकती है.
पिछले हफ़्ते जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में मिले तो बहुत ही सदभावपूर्व माहौल था.
लेकिन हिमालयी क्षेत्र में सीमा के मुद्दे पर गतिरोध बना रहा और अंतरिक्ष के मामले में भी दोनों ही देश अपनी श्रेष्ठता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.
भारत का पहला मंगल अभियान, क्लिक करेंमंगलयान, इस समय अपने 300 दिन के मैराथन पर है, जिसमें उसे 67 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय करनी है.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 24 सितंबर की सुबह अपने इस अंतरिक्ष यान को धीमा करेगा ताकि यह मंगल की कक्षा में स्थापित हो सके.
इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन कहते हैं कि अगर यह सफल हुआ तो ''भारत ऐसा करना वाला भारत एशिया का पहला देश बन जाएगा और अगर यह पहले प्रयास में ही संभव हो पाया तो भारत अपने दम पर दूरस्थ मंगल ग्रह पर पहले ही प्रयास में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा.''
रूस और अमरीका भी अपने पहले प्रयास में यह कारनामा नहीं कर पाए थे.
चीन का पहला मंगल अभियान, यंगहाउ-1, 2011 में असफल रहा. इसे रूस के प्रोबोस-ग्रंट अभियान के साथ छोड़ा गया था.
इससे पहले 1998 में जापान का मंगल अभियान ईंधन ख़त्म होने के कारण विफल रहा.
इसमें दो राय नहीं है कि बहुत बाद में शुरू करने वाला भारत मंगल ग्रह पर पहुंचने के प्रयास में अपने एशियाई प्रतिद्वंद्वी से आगे है.
राधाकृष्णन कहते हैं, ''हम किसी से मुक़ाबला नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी क्षमता को उच्च स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.''
मंगल की ग्रह में चक्कर लाने वाला भारत का यह अभियान स्वदेश निर्मित एक रोबोटिक यान है जिसका वज़न 1350 किलोग्राम है. .
इसे बंगाल की खाड़ी में स्थित भारत के उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र श्रीहरिकोटा से पांच नवंबर 2013 को छोड़ा गया था.
इसरो के अनुसार, ''तब से लेकर यह अभियान उम्मीद के अनुरूप कार्य कर रहा है और सूर्य से आधी दूरी पर स्थित मंगल की ओर तेज़ गति से अग्रसर है.''
वो 24 मिन
राधाकृष्णन कहते हैं, ''इस अभियान पर 450 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. अभी तक दुनिया के किसी भी अंतरग्रहीय अभियान के मुक़ाबले यह सबसे सस्ता है.''
30 जून 2014 को भारत के उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र के अपने दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, ''हमारे मंगल अभियान की लागत हॉलीवुड फ़िल्म 'ग्रैविटी' से भी कम है. यह भारत के लिए एक उपलब्धि है.''
भारत का कम लागत और तेज़-मोड़ लेने में सक्षम यह उपग्रह अभियान, रहस्यमयी मंगल के बारे में और जानने के इच्छुक दुनियाभर के वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान खींच रहा है.
24 सितंबर की सुबह इसरो मंगलयान को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश करेगा और इसे धीमा करने के लिए यान में मौजूद इंजन को 24 मिनट तक चलाएगा.
यह एक पेचीदा प्रक्रिया है क्योंकि अगर यह पर्याप्त धीमा नहीं हुआ तो मंगल के गुरुत्वाकर्षण की ज़द में नहीं आ पाएगा और अंतरिक्ष में खो जाएगा.
लेकिन अगर इंजन ने ज़रूरत से ज़्यादा काम कर दिया तो यह मंगलयान को इतना धीमा कर देगा कि यह मंगल की सतह से टकरा कर नष्ट हो जाएगा.
वर्ष 1960 से लेकर अभी तक दुनिया भर में मंगल पर 51 अभियान भेजे गए और इनकी सफलता की दर 24 प्रतिशत रही है. इसलिए भारत के इस अभियान पर दवाब ज़्यादा है.
भारतीय मंगल अभियान के प्रमुख एम अन्नादुरै का कहना है, ''हमें विश्वास है कि भौतिक विज्ञान के नियम भारत की मदद करेंगे और देश जल्द ही अपने पहले रोबोटिक मंगल अभियान में सफल होगा.''
इसरो इस मिशन को 'तकनीक का प्रदर्शन' मान रहा है जो दुनिया को दिखा रहा है कि अब यह देश 'सपेरों का देश' नहीं रहा बल्कि हाईटेक देश हो चुका है, जिसने तमाम प्रतिबंधों और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी तकनीक ख़ुद विकसित की.
अगर वाक़ई मंगलयान मंगल तक पहुंच गया तो मोदी के अमरीकी दौरे से पहले यह एक बड़ा वैश्विक भू राजनितिक संदेश होगा.
हालांकि छह महीने के अपने बहुत ही नगण्य कार्यकाल में यह मंगल के वातावरण का अध्ययन करेगा.
यह मीथेन गैस का पता लगाएगा, रहस्य बने हुए ब्रह्मांड के उस सवाल का भी पता लगाएगा कि क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं?
अनुमान है कि कक्षा में स्थापित होने के कुछ ही घंटों में यान एक भारतीय आंख द्वारा मंगल ग्रह की ली गई तस्वीरें भेजना शुरू कर देगा.
इससे क्लिक करेंमंगल का पानी कैसे ख़त्म हो गया जैसे सभी महत्वपूर्ण सवालों को समझने में मदद मिलेगी, जो पृथ्वी पर इंसानों के लंबे समय तक अस्तित्व बने रहने के लिए ज़रूरी हैं.
मंगल अभियान की रेस के ज़रिए देश ने कठिन अंतरग्रहीय यात्रा अभियानों को अपने हाथ में लेने की तकनीकी दक्षता दिखाई है.
इस तथ्य के बावजूद कि भारत के 40 करोड़ लोग अब भी बिना बिजली के रहते हैं और 60 करोड़ लोगों के पास शौचालय नहीं हैं
सुपर पॉवर
इस अंतरिक्ष दौड़ को लेकर बहुत सारे सवाल हैं और कहा जा रहा है कि सुपर पॉवर बनने की चाहत में भारत का यह 'भ्रमित सपना' है.
हालांकि, सही मायने में मंगलयान की कीमत चार रुपए प्रति भारतीय है, जो एक अरब 20 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए कोई बहुत बड़ी राशि नहीं है.
लेकिन मंगल ग्रह पर पहुंचने के 300 दिन के अपने इस 'लॉन्ग मार्च' में, भारतीय हाथी निःसंदेह लाल ड्रैगन से आगे है.
देश के लिए एक छोटी सी ख़ुशी है जो 21वीं सदी में सुपर पॉवर बनने के लिए प्रेरित करती है.
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latest news: Man gets life imprisonmen to death wife
latest news: Man gets life imprisonmen to death wife: Man gets life imprisonment for burning to death wife in UP :- Muzaffarnagar: A man has been sentenced to life imprisonment for killi...
Man gets life imprisonmen to death wife
Man gets life imprisonment for burning to
death wife in UP :-
Muzaffarnagar: A man has been sentenced to life imprisonment for killing his wife by setting her ablaze, with the court relying on her dying declaration though all the witnesses turned hostile during the trial.
Additional District Sessions Judge Arvind Upadhaye convicted Nitu under Section 302 (murder) of IPC, according to government counsel Yashpal Singh.
The court also imposed a fine of Rs 20,000 on the convict. see more click wife
Nitu poured kerosene on his wife Pinki and set her ablaze when she opposed his drinking habit at Hasanpur village on January 16, 2010.
Pinki was rushed to a hospital where she gave her statement before a magistrate.
The couple were married in 2007.
During the trial, all eyewitnesses turned hostile. But the court found the husband guilty on the basis on the dying declaration of the victim.
see more click here wifer
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Sunday, 21 September 2014
Saturday, 20 September 2014
Friday, 19 September 2014
वज़न घटाने का नुस्ख़ा:--
वज़न घटाने का नुस्ख़ा , अमरूद खाकर वज़न घटायें:-
see video click loss weight
अमरूद वज़न घटाने के साथ-साथ पौष्टिकता भी प्रदान करता है। अमरूद की अच्छी बात यह है कि इस फल को आप किसी भी रूप में खा सकते हैं, जैसे- जूस, जेली, जैम या फल के रूप में ।
अमरूद खाने से वज़न कम होने के कई कारण है-
- इसमें पोटाशियम अधिक मात्रा में होता है,
- जिससे मांसपेशियाँ उन्नत तो होती ही हैं
- साथ में फैट भी नष्ट होता है।
- see more point click fat loss
- एक अमरूद में 688 मिलीग्राम पोटाशियम की मात्रा होती है।
- अमरूद खाने का एक सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि यह रक्त में शुगर सोखने की मात्रा को कम करके वज़न घटाने की प्रक्रिया को उन्नत करता है। इसलिए यह मधुमेह (see about diabetes) रोगी के लिए अच्छा होता है।
इसमें फाइबर की मात्रा ज़्यादा होने के कारण शरीर से सैचुरेटेड फैट को कम करने में मदद करता है। इसको खाने से पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है जिसके कारण यह वज़न घटाने वालों के लिए आदर्श आहार माना जाता है। see video
Saturday, 6 September 2014
जम्मू-कश्मीर में हर तरफ तबाही:-
जम्मू-कश्मीर में हर तरफ तबाही, 100 से ज्यादा मौतें,
जम्मू और कश्मीर में कुदरत ने पिछले साठ सालों में सबसे भयावह कहर बरपाया है। पिछले तीन दिनों से जारी बारिश और बाढ़ से राज्य में मरने वालों और लापता लोगों की संख्या 130 के पार पहुंच गई है। इनमें से मृतकों की संख्या 100 के करीब बताई जा रही है। पुलवामा जिले में राहत अभियान के दौरान नाव पलटने से एक अधिकारी सहित नौ सैन्यकर्मी झेलम नदी की तेज धारा में फंस गए। इन जवानों को बचाने की कोशिश की जा रही है। श्रीनगर में एयरपोर्ट रूट सहित दक्षिणी हिस्सों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि पुलवामा जिले के पंपोर क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान में लगे सैन्यकर्मियों की एक टीम उस समय झेलम नदी की तेज धारा में फंस गई, जब उन्हें ले जा रही नाव पलट गई। उन्होंने बताया कि 11 सैन्यकर्मी सुरक्षित लौटने में सफल रहे लेकिन नौ सैन्यकर्मी अभी भी फंसे हैं। इन लोगों को वहां से निकालने के लिए दो हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं।
शुक्रवार को राजौरी जिले में मकान गिरने से 13 लोगों की मौत के साथ पूरे राज्य में 54 लोगों की जान चली गई। राज्य में बिजली ढांचा बुरी तरह चरमरा गया है और संचार सेवाएं अस्त-व्यस्त हैं। जम्मू और कश्मीर संभाग में 300 से अधिक गांव जलमग्न हो चुके हैं। शहर की सड़कें नदी में तब्दील हैं और कई इलाकों से संपर्क पूरी तरह कट चुका है। अनगिनत कच्चे-पक्के मकान, स्कूल, सरकारी इमारतें और अन्य भवन ढह चुके हैं।
चिनाब, झेलम सहित लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सेना ने जम्मू में ऑपरेशन 'मेघ राहत' और कश्मीर में 'मिशन सहायता' शुरू किया है। इसके अलावा पुलिस के साथ दिल्ली और पंजाब से पहुंची नैशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) की टीमों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लेने के लिए आज राज्य के दौरे पर हैं।
गुरुवार को बाढ़ में बही बारातियों की बस की तलाश कर 27 लोगों के शव बरामद कर लिए गए। इस हादसे में दूल्हा सहित 60 से अधिक बाराती बह गए थे। राजौरी की थन्नामंडी में एक मकान में परिवार के 12 सदस्य बैठे हुए थे। इस दौरान बारिश तेज होने के कारण बाहर से गुजर रहा एक व्यक्ति भी वहीं पर रुक गया। कुछ ही पलों में पहाड़ से भूस्खलन होने से पूरा मकान मलबे में दब गया। सेना और पुलिस ने मिलकर राहत अभियान चलाया, लेकिन सभी 13 लोगों की मौत हो गई। अब इस परिवार का कोई ऐसा सदस्य नहीं बचा है, जो जनाजों को कंधा दे सके।
पुंछ जिले के विभिन्न हिस्सों में जमीन धंसने से 14 लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार देर रात साब्जियां क्षेत्र में मलबे के नीचे दबने से पांच लोगों की मौत हो गई। इसी तरह से सुरनकोट तहसील के हिल काका क्षेत्र में भी जमीन धंसने से कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इसमें भी पांच लोगों की जान चली गई। मलबे में दबकर मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। जम्मू के अखनूर के परगवाल के साथ सतवारी, मढ़, आरएसपुरा, सांबा जिले के रामगढ़ में भी कई गांव पानी में डूबे हुए हैं। खौड़ में मनावर तवी से भी एक युवती का शव मिला है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हालात देखने रात को स्वयं बाढ़ पीड़ित इलाकों में पहुंचे। अब्दुल्ला ने तीन महीने के एक बच्चे और उसके पूरे परिवार की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। बाराजुला इलाके में स्थित बोन ऐंड जॉइंट अस्पताल में मरीजों को ग्राउंड फ्लोर से ऊपरी मंजिलों पर शिफ्ट करने के दौरान उमर उपस्थित रहे।
इसी दौरान इलाके के एक घर में पानी भरता देख उमर वहां पहुंचे और उस घर में रह रहे परिवार के लोगों को मकान खाली करने को कहा। मकान में रहने वाली महिला ने अपने तीन महीने के बच्चे के घर में फंसे होने की वजह से निकलने से इनकार किया। इस पर उमर ने पहले तो उस महिला और उसके पति को वहां से निकाला और फिर अपने निजी सुरक्षा कर्मियों को उसके बच्चे को बचाने के लिए कहा और खुद भी जुट गए। बच्चे को सुरक्षित मकान से निकालकर मां-बाप के हवाले करने के note:-this is original post link here.http://tinyurl.com/ll9mrgm
बाद परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
Friday, 5 September 2014
MOTHER TERESA RELATED NEWS
Mother Teresa 17th death anniversary: 7 lesser known facts about the legendary nun:----SEE MORE PICTURE...
Practice what you preach, goes the saying, but how many of us really follow it? Not all, or hardly anyone. But Mother Teresa did it. She pledged to spend her life for the well being of the needy and she practiced what she preached. She strove for the poor until her last breath. Today is her 17th death anniversary and the world still remembers her for her noble deed. Here are some unknown facts about the founder of Missionaries of Charity (Calcutta) that perfectly exemplifies her work.
‘I alone cannot change the world, but I can cast a stone across the waters to create many ripples’
- Her Birth: Born as Agnes Gonxha Bojaxhiu in Albania in the year 1910, Mother Teresa’s family was financially sound until her father’s death.see more..
- Her family: Agnes left her home at the age of 18 to join the Sisters of Loreto in Ireland. Since then she never saw her mother and sister.see more...
- Vows to be a nun: Agnes vowed to be a nun in 1931 and chose to be called as Teresa after the Saint Teresa of Avila.
- Admiration: The Catholic Church beatified Mother Teresa as Blessed Teresa of Calcutta in 2003 – years after her death. Albania’s international airport is named after Mother Teresa as the Aeroporti Nene Tereza.
- Great work: Mother Teresa rescued 37 children from a frontline hospital war zone. While travelling, she carried leftover food from the airplane and gave it to the poor and hungry.
- Sacrifice: Mother Teresa turned down the traditional Nobel Prize honour and instead requested funds of US$192,000 for the poor in India.
- Achievements: Mother Teresa has received several awards for her charity work, one of which includes the Presidential Medal of Freedom from US President Ronald Reagan.
The legendary nun Mother Teresa passed on September 5, 1997 at 9:30 pm due to heart attack. Despite her death her noble deed is still being carried on by the Roman Catholic congregation she established. Today, Missionaries of Charity has more than 4500 sisters and operates in over 130 countries across the world
note:-this is original post link here.http://tinyurl.com/lc8hw79
india closs the match
india loss the match
India vs England 5th ODI:- India lose despite Ravindra Jadeja’s heroics at Headingley; win series 3-1
Ravindra Jadeja’s heroics went in vain as England beat India by in the fifth One-Day International (ODI) of the five-match series at Headingley in Leeds on Friday. However, the 43-run win happened to be only a consolation for the home side as they lost the series 1-3 with the first match at Bristol getting abandoned due to rain. This is India’s first bilateral series win in England since 1990.
Chasing a target of 295, India’s chase got off to the possible start as they lost the wicket of Ajinkya Rahane, who had scored a century in the last match, in the very first over. The innings never stabilized thereafter. There were a couple of half-centuries from Ambati Rayudu and Ravindra Jadeja, but it was all about delaying the inevitable.
In the process, Jadeja registered his highest ODI score as he smashed his way to a 68-ball 87 which included nine boundaries and two sixes.
Earlier, Joe Root‘s century and handy knocks by Alastair Cook and Jos Buttler helped England reach 294 for seven in 50 overs Root’s 113 was only his second century in ODIs and first against India.
For once in the series, England batting looked at home, seemed like it was a contest between two international sides. Even though the result of the match holds only academic interest, there is a lot for the current England ODI outfit to prove to their critics. Joe Root and Jos Buttler‘s innings had enough matter to answer to the detractors. There was purpose to their batting and for once England weren’t making a mockery of themselves.
Buttler scored a qucikfire 40-ball 49 not only lifted England’s run rate, but also pushed Root to push a gear up. The Yorkshire batsman had started slowly, initially resurrecting England’s innings after two early wickets. His innings included as many uncharacteristic slogs as there were exquisite straight drives. He was unbeaten on 113 at the end of 45 overs. In between all the cricket, there were also a few heated words exchanged between Root and Virat Kohli at the end of the 43rd over.
Earlier in the day, Mahendra Singh Dhoni had won the toss and elected to field for the third consecutive match. There was a bit of moisture in the grass and the pitch offered good help to the batsmen. The conditions were good with clear skies.
Yet again, the England openers looked comfortable against the early movement. Unlike the previous matches, England skipper Alastair Cook came out with the intention of attacking. The hosts got off to a good start, but often got carried away.
Umesh Yadav, who got a chance in the starting XI bowled with a lot of pace and aggression, generating good bounce off the pitch. Alex Hales was dismissed trying to pull a short pitched delivery which came much quicker to the bat than the English opener would’ve expected.
Moeen Ali, after a good performance with the bat in the previous match, was promoted to number three in the batting order. His stay wasn’t for too long after he gifted his wicket away to Bhuvneshwar Kumar trying to get too flashy. It was eventually upto Cook and Root to resurrect the English innings, which again left in tatters. The duo put on a good half-century stand to put England in a good position.
Cook, especially, showed signs of regaining form as he struck eye-pleasing straight drives and cover drives. However, the tide of the match turned as soon as Dhoni introduced spin into the attack. Cook looked at seas against the slowness of Ravichandran Ashwin and Suresh Raina before eventually losing his wicket against the latter.
Brief Score:
England: 294/7 in 50 overs (Joe Root 113; Jos Buttler 49; Mohammed Shami 2/52) vs India 253 in Xovers (Ravindra Jadeja 87, Ambati Rayudu 53; Ben Stokes 3/47 ) by 41 runs see more...
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Tuesday, 2 September 2014
सनी लियोन के लिए खतरा सुरवीन चावला, क्रीचर में हॉट धमाल.....see
आजकल का फंडा है कि ..&&&..फिल्म में कुछ ऐसा मसाला डाल दो जिससे फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाई करने के लिए अपने पांव पर मजबूती से खड़ी हो सके.
हेट स्टोरी-2 से बॉलीवुड में सेक्स की बौछार के साथ शुरुआत करने वाली सुरवीन चावला ने क्रीचर 3डी के लिए एक प्रमोशनल सॉन्ग शूट किया है. इस सॉन्ग में भी सुरवीन ने दिखा दिया है कि वे अपना कहर बरपाना जारी रखेंगी.'सावन आया है' नाम से इस सॉन्ग को कुछ दिन पहले शूट किया गया है. इस गाने में सुरवीन के साथ रजनीश दुग्गल नजर आ रहे हैं. दोनों की केमेस्ट्री कहर ढाने का काम कर रही है.
सुरवीन ने लगता है कि ठान लिया है कि वे लिप लॉक और अपने हॉट अंदाज की वजह से सुर्खियों में बनीरहेंगी. इसी की बदौलत तो हेट स्टोरी-2 ने बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी भी हासिल की थी. इस गाने में दोनों ने प्यार की जबरदस्त पींगें बढ़ाई हैं और खूब गरमाहट बिखेरी है. तो क्या अब सनी लियोन के लिए खतरा पैदा हो गया है....see more
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टीम इंडिया ने रचा इतिहास, 24 साल बाद इंग्लैंड में सीरीज पर कब्जा
टीम इंडिया ने रचा इतिहास, 24 साल बाद इंग्लैंड में सीरीज पर कब्जा, रहाणे का शानदार शतक......see more..
रहाणे-धवन की शानदार बल्लेबाजी
और भी...
इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज के चौथे मैच में टीम इंडिया नौ विकेट और 19.3 ओवर शेष रहते ही 207 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया. शिखर धवन ने हैरी गर्ने की गेंद पर छक्का जड़कर शानदार जीत दिलाई. इस मैच के साथ ही टीम इंडिया ने टेस्ट सीरीज में मिली 1-3 की हार का बदला पूरा करते हुए वनडे सीरीज अपने नाम कर ली है. धवन 97 रन बनाकर नाबाद लौटे तो वहीं अजिंक्य रहाणे ने आउट होने से पहले अपने वनडे करियर के शतक का सूखा खत्म करते हुए 106 रनों की जबरदस्त पारी खेली. रहाणे को मैन ऑफ द मैच चुना गया.and more..
देखें मैच का स्कोरकार्ड...see more...
इन दोनों ने मिलकर टीम इंडिया की जीत सुनिश्चित की. लंबे समय से आउट आफ फॉर्म चल रहे शिखर धवन ने पचासा जड़कर अपनी खोई लय हासिल की. धवन ने 81 गेंद पर 11 चौके और 4 छक्कों की मदद से 97 रन बनाए. इंग्लैंड को 49.3 ओवर में 206 रनों पर समेटने के बाद रहाणे और धवन ने भारत को शानदार शुरुआत दिलाई. दोनों ने पहले विकेट के लिए 183 रनों की साझेदारी की and टीम इंडिया को जीत के करीब पहुंचाया. इंग्लैंड की पारी के दौरान मोईन अली ने छक्के से अपना पचासा पूरा किया था और टीम इंडिया के इन दोनों बल्लेबाजों ने भी इसी तरह पचासा जड़ा. रहाणे ने 60 गेंद पर अपना पचासा पूरा किया and more....
ऐसा लग रहा था कि ये दोनों बल्लेबाज तय करके आए थे कि इंग्लैंड के किसी गेंदबाज को नहीं छोड़ेंगे. रहाणे ने अली की गेंद पर छक्का जड़कर 50 रन पूरे किए तो धवन ने अपने पचासा के लिए जेम्स एंडरसन को शिकार बनाया. रहाणे ने 96 गेंद पर सेंचुरी जड़ी और 106 रन बनाने के बाद गर्ने की गेंद पर एलिस्टेयर कुक को कैच थमा बैठे.
इंग्लैंड के हिस्से यही एकमात्र विकेट आया. रहाणे के आउट होते ही धवन ने जिस तरह से खेलना शुरू किया, ऐसा लग रहा था कि वो जल्द से जल्द मैच खत्म करना चाहते थे. उन्होंने रहाणे के आउट होने के बाद विराट कोहली के साथ मिलकर महज 11 गेंद पर 29 रन बनाकर टीम इंडिया को जीत दिलाई...and more....
गेंदबाजी की बात करें तो, भारत की ओर से मोहम्मद शमी ने तीन, भुवनेश्वर कुमार और रवींद्र जडेजा ने दो-दो, जबकि सुरेश रैना और आर अश्विन ने एक-एक विकेट लिया. इंग्लैंड की तरफ से मोईन अली ने 67 रनों की तेज पारी खेली.
इससे पहले भारत ने टॉस जीतकर एकबार फिर मेजबान टीम को बल्लेबाजी का न्योता दिया. भारतीय गेंदबाज ने कसी हुई गेंदबाजी से एलिस्टेयर कुक और एलेक्स हेल्स को परेशान किया, जिसका फायदा पांचवें ओवर में मिला. भुवनेश्वर कुमार ने हेल्स को क्लीन बोल्ड कर टीम इंडिया को पहली सफलता दिलाई. हेल्स ने 7 गेंद का सामना करते हुए 6 रन बनाए. इसी ओवर में भुवी ने कुक को भी चलता कर दिया. 19 गेंद पर 9 रन की पारी खेल इंग्लिश कप्तान सुरेश रैना को कैच थमा पवेलियन लौटे.
तीसरा विकेट मोहम्मद शमी के खाते में गया. शमी ने गैरी बैलेंस को अजिंक्य रहाणे के हाथों कैच कराया. बैलेंस ने 19 गेंद पर 7 रन बनाए. इसके बाद जोए रूट और इयोन मोर्गन ने मिलकर पारी को संभाला और संवारा भी. 23 रन पर तीन विकेट खो चुकी मेजबान टीम को 103 रनों तक पहुंचाया. रवींद्र जडेजा ने ये जोड़ी तोड़कर एकबार फिर मेजबान टीम को बैकफुट पर ढकेल दिया.
मोर्गन 58 गेंद पर 32 रन बनाकर सुरेश रैना को कैच थमा बैठे. इस दौरान मोर्गन के बल्ले से 3 चौके निकले. मोर्गन के बाद जोस बटलर रूट का साथ देने क्रीज पर उतरे. रूट पचासा जड़ने के करीब पहुंच कर आउट हो गए. सुरेश रैना की गेंद पर उन्होंने धवल कुलकर्णी को कैच थमाया. इस तरह से इंग्लैंड का स्कोर 114 रन पर पांच विकेट हो गया. रूट ने 81 गेंद का सामना करते हुए 2 चौके जड़े और 44 रन बनाए.
एक छोर पर अली ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर रहे थे तो बटलर दूसरे छोर पर विकेट बचाकर खेल रहे थे, लेकिन मोहम्मद शमी को कप्तान एमएस धोनी ने जैसे ही गेंद थमाई उन्होंने अपने इस स्पेल के पहले ओवर में बटलर को चलता किया. बटलर एलबीडब्ल्यू आउट हुए, हालांकि रिप्ले में साफ दिखा कि गेंद विकेट के ऊपर से निकलती, लेकिन अंपायर ने उन्हें आउट दिया. क्रिस वोक्स क्रीज पर मोईन अली का साथ देने पहुंचे. वोक्स 18 गेंद पर 10 रन बनाकर रन आउट हुए.
इंग्लैंड का स्कोर 201 हुआ था कि आर अश्विन ने अली को आउट कर इंग्लैंड को तगड़ा झटका दिया. अली ने 50 गेंद पर 3 छक्के और 4 चौकों की मदद से 67 रन बनाए. इसके बाद स्टीवन फिन के रूप में इंग्लैंड को नौवां झटका जडेजा ने दिया. आखिरी ओवर करने आए मोहम्मद शमी ने हैरी गर्ने को क्लीन बोल्ड कर इंग्लैंड की पारी का अंत किया.
इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने सीरीज भी जीत ली है. पांच मैचों की वनडे सीरीज में टीम इंडिया 3-0 से आगे है, जबकि एक मैच अभी और खेला जाना है.
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Monday, 1 September 2014
जानिए आखिर कैसे Apple से आगे निकल गया Micromax brand
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इंटरनेशनल डाटा कॉरपोरेशन की नई रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोमैक्स के पास भारतीय टैबलेट बाजार की 14 फीसद हिस्सेदारी आ गई है और इस तरह वह एप्पल को पछाड़कर दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. एप्पल नौ फीसद हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान है, जबकि सैमसंग 19 फीसद हिस्सेदारी के साथ भारतीय टैबलेट बाजार में शीर्ष पर बना हुआ है.
जाहिर है एप्पल को पछाड़ना माइक्रोमैक्स के लिए सफलता की नई इबारत है, लेकिन टैबलेट कंप्यूटिंग के जन्मदाता का फिसलकर तीसरे स्थान पर पहुंचना यूं ही नहीं है. एप्पल की बिक्री में आई गिरवाट के पीछे एक से अधिक कारण रहे हैं.
ब्रांड- एप्पल एक लग्जरी ब्रांड है. बिक्री और मार्केट शेयर में एप्पल भले ही तीसरे स्थान पर पहुंच गया हो, लेकिन कंपनी का iPad Air अभी भी बाजार में उपलब्ध सभी टैबलेट्स से बेहतर है. एप्पल अपनी क्वालिटी और कीमत के कारण लग्जरी प्रोडक्ट सेक्शन में टॉप पर है. एप्पल जानता है कि कीमतों में कटौती का मतलब प्रोडक्ट को आम लोगों की पहुंच में लाना है और यह उसे 'खास' से 'आम' बना देगा. यही कारण है कि हर नया आईपैड पुराने की जगह ले लेता है और कंपनी पुराने आईपैड को बंद कर देती है.
बिक्री- एप्पल जब भी कोई प्रोडक्ट लॉन्च करता है, उससे पहले उसकी बुकिंग शुरू हो जाती है. ऐसे में लॉन्च के समय कंपनी बिक्री का रिकॉर्ड बना लेती है. जब बिक्री सामान्य हो जाती है तब भी कंपनी कीमतों में कटौती नहीं करती.
इससे उलट, सैमसंग और माइक्रोमैक्स जैसी कंपनियां समय के साथ अपने प्रोडक्ट की कीमतों में कटौती करती रहती हैं. एप्पल अपने प्रोडक्ट की कीमत आंशिक कटौती तभी करता है, जब उसे नया वर्जन लॉन्च करना होता है. जैसा कि आईफोन 6 लॉन्च से पहले कंपनी आईफोन 5 एस की कीमतों में कमी देखने को मिल रही है.
प्रोडक्ट- सैमसंग टैबलेट बाजार में नंबर वन है. बाजार में सैमसंग के 10 टैबलेट मॉडल मौजूद हैं. माइक्रोमैक्स ने भी 4 मॉडल लॉन्च कर रखे हैं. जबकि एप्पल ने सिर्फ 2 टैबलेट मॉडल लॉन्च किए हैं.
ऑपरेटिंग सिस्टम- सैमसंग और माइक्रोमैक्स के टैबलेट्स एंड्रॉयड बेस्ड होते हैं. मौजूदा समय में टेक लवर्स के लिए एंड्रॉयड सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है. दूसरी ओर, एप्पल आईपैड में IOS इस्तेमाल करता है.
कीमत- जैसा कि पहले ही स्पष्ट है प्राइस वार में सैमसंग और माइक्रोमैक्स एप्पल पर भारी पड़ते हैं. आम तौर पर सैमसंग टैबलेट की कीमत 15 हजार से शुरू होकर 60 हजार तक जाती है, वहीं आईपैड की कीमत 17 हजार से 65 हजार तक है. इस सेग्मेंट में माइक्रोमैक्स राजा है. इसके टैबलेट्स की कीमत 5 हजार से शुरू होकर 10 हजार पर ही खत्म हो जाती है. यानी कम दाम में बेहतर. और भी...click here...
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