see more....................जानिए, स्मिता तलवालकर की कही अनकहीं बातें
मुंबई। मशहूर मराठी अभिनेत्री स्मिता तलवालकर का मंगलवार रात मुंबई के जसलोक अस्पताल में निधन हो गया। वे 58 वर्ष की थीं और कैंसर से पीडित थीं। 5 सितम्बर 1954 को को जन्मी स्मिता गोविलकर, तलवालकर को प्रसिद्धि विरासत में नहीं मिली बल्कि इसके लिए काफी संघर्ष किया।
आइए, जानते है उनके फिल्मी संघर्ष की कहानी।
17 साल तक न्यूज रीडर
एक्टिंग में आने से पहले स्मिता 17 साल तक न्यूज रीडर थीं। स्मिता ने 1986 में फिल्म "तू सौभाग्यवती हो" से सिनेमा की दुनिया में कदम रखा। इसी साल उनकी "गड़बड़ घोटाला" रिलीज हुई। दोनों फिल्में स्मिता के शुरूआती करियर में हिट साबित हुई।
प्रोडक्शन में रखा कदम
इसके बाद 1989 में स्मिता ने फिल्म "कलत नकालत" से निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। इसके लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया। 1991 में तलवालकर ने फिल्म चौकट राजा में मिनल का रोल अदा किया। इसका निर्माण भी स्मिता ने ही किया था।
इसके बाद उन्होंने सवात मांझी लड़की, तु थीते मी, सात्च्या आत घरात, आनंदाचे झाड़ जैसी कई फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने फिल्मों के साथ साथ टीवी धारावाहिकों का निर्माण भी किया। उन्होंने एक फिल्म का निर्देशन भी किया था। स्मिता ने "चौकट राजा", "चेकमेट", "एक होती वाडी", "जन्मा" और "प्रेम म्हांजे प्रेम म्हांज प्रेम अस्ता" जैसी कई फिल्मों में काम किया। - See more at: www.raghurajcashcode.com
कटक(ओडिशा) : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि अगर इंग्लैंड में रहने वाले अंग्रेज हैं, जर्मनी में रहने वाले जर्मन हैं और अमेरिका में रहने वाले अमेरिकी हैं तो फिर हिन्दुस्तान में रहने वाले सभी लोग हिन्दू क्यों नहीं हो सकते।
उड़िया भाषा के एक साप्ताहिक पत्रिका के स्वर्ण जयंती समारोह में भागवत ने कहा, 'सभी भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान हिंदुत्व है और देश में रहने वाले इस महान सस्कृति के वंशज हैं।'
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व एक जीवन शैली है और किसी भी ईश्वर की उपासना करने वाला अथवा किसी की उपासना नहीं करने वाला भी हिंदू हो सकता है। स्वामी विवेकानंद का हवाला देते हुए भागवत ने कहा कि किसी ईश्वर की उपासना नहीं करने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि कोई व्यक्ति नास्तिक है, हालांकि जिसका खुद में विश्वास नहीं है, वह निश्चित तौर पर नास्तिक है।
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया अब मान चुकी है कि हिंदुत्व ही एकमात्र ऐसा आधार है, जिसने भारत को प्राचीन काल से तमाम विविधताओं के बावजूद एकजुट रखा है।
मुंबई। मशहूर मराठी अभिनेत्री स्मिता तलवालकर का मंगलवार रात मुंबई के जसलोक अस्पताल में निधन हो गया। वे 58 वर्ष की थीं और कैंसर से पीडित थीं। 5 सितम्बर 1954 को को जन्मी स्मिता गोविलकर, तलवालकर को प्रसिद्धि विरासत में नहीं मिली बल्कि इसके लिए काफी संघर्ष किया।
आइए, जानते है उनके फिल्मी संघर्ष की कहानी।
17 साल तक न्यूज रीडर
एक्टिंग में आने से पहले स्मिता 17 साल तक न्यूज रीडर थीं। स्मिता ने 1986 में फिल्म "तू सौभाग्यवती हो" से सिनेमा की दुनिया में कदम रखा। इसी साल उनकी "गड़बड़ घोटाला" रिलीज हुई। दोनों फिल्में स्मिता के शुरूआती करियर में हिट साबित हुई।
प्रोडक्शन में रखा कदम
इसके बाद 1989 में स्मिता ने फिल्म "कलत नकालत" से निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। इसके लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया। 1991 में तलवालकर ने फिल्म चौकट राजा में मिनल का रोल अदा किया। इसका निर्माण भी स्मिता ने ही किया था।
इसके बाद उन्होंने सवात मांझी लड़की, तु थीते मी, सात्च्या आत घरात, आनंदाचे झाड़ जैसी कई फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने फिल्मों के साथ साथ टीवी धारावाहिकों का निर्माण भी किया। उन्होंने एक फिल्म का निर्देशन भी किया था। स्मिता ने "चौकट राजा", "चेकमेट", "एक होती वाडी", "जन्मा" और "प्रेम म्हांजे प्रेम म्हांज प्रेम अस्ता" जैसी कई फिल्मों में काम किया। - See more at: www.raghurajcashcode.com
कटक(ओडिशा) : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि अगर इंग्लैंड में रहने वाले अंग्रेज हैं, जर्मनी में रहने वाले जर्मन हैं और अमेरिका में रहने वाले अमेरिकी हैं तो फिर हिन्दुस्तान में रहने वाले सभी लोग हिन्दू क्यों नहीं हो सकते।
उड़िया भाषा के एक साप्ताहिक पत्रिका के स्वर्ण जयंती समारोह में भागवत ने कहा, 'सभी भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान हिंदुत्व है और देश में रहने वाले इस महान सस्कृति के वंशज हैं।'
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व एक जीवन शैली है और किसी भी ईश्वर की उपासना करने वाला अथवा किसी की उपासना नहीं करने वाला भी हिंदू हो सकता है। स्वामी विवेकानंद का हवाला देते हुए भागवत ने कहा कि किसी ईश्वर की उपासना नहीं करने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि कोई व्यक्ति नास्तिक है, हालांकि जिसका खुद में विश्वास नहीं है, वह निश्चित तौर पर नास्तिक है।
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया अब मान चुकी है कि हिंदुत्व ही एकमात्र ऐसा आधार है, जिसने भारत को प्राचीन काल से तमाम विविधताओं के बावजूद एकजुट रखा है।

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